गहलोत सरकार: भारत की पहली मदरसा सरकार

दिवाली में मदरसों को मिलेगा 'दिवाली बोनस'!

राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार के भीतर मची उथल पुथल के चर्चे किसी से छिपे नहीं है। राज्य में अपराध के आंकड़ों के कारण पहले ही गहलोत सरकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब गहलोत सरकार राज्य में मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति को एक नई ऊंचाई देने की तैयारी कर चुकी है। राज्य सरकार ने दिवाली में मदरसों को दिवाली बोनस देने का ऐलान किया है, जो कि 15 से 25 लाख तक का है। इस फैसले के बाद राज्य में भाजपा ने गहलोत सरकार पर हमला बोल दिया है। भाजपा ने तो यहां तक आरोप लगाएं हैं कि दिवाली के हिन्दूवादी त्योहार में कांग्रेस सरकार तुष्टीकरण की पराकाष्ठाओं को पार कर चुकी है, जो कि काफी हद तक सही भी है।

मदरसों को मिलेगा बोनस
राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के कारनामे हमेशा ही आलोचनात्मक रहे हैं। ऐसे में अब एक नया फैसला सरकार की नीयत को अधिक स्पष्ट करता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, गहलोत सरकार मदरसों को इस वर्ष दिवाली बोनस के तौर पर 15 से 25 लाख रुपए देने का फैसला ले चुकी है। खबरों के मुताबिक मुस्लिमों को यह फंडिंग मुख्यमंत्री मदरसा आधुनिकीकरण योजना के अंतर्गत प्रदान की जा रही है। इस मामले में राजस्थान मदरसा बोर्ड ने प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की है। प्रेस विज्ञप्ति में राजस्थान मदरसा बोर्ड में रजिस्टर्ड A कैटेगरी के मदरसों के लिए आवेदन मांगे गए हैं।

इस प्रेस विज्ञाप्ति में स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश की योजना के तहत प्राथमिक मदरसों के विकास के लिए 15 लाख रुपए और उच्चस्तरीय मदरसों के लिए 25 लाख रुपए दिए जाएंगे। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 20 अक्टूबर रखी गई है। गौरतलब है कि इस योजना में 90 फीसदी खर्च प्रदेश सरकार द्वारा उठाया जाएगा। वहीं 10 फीसदी खर्च मदरसे उठाएंगे। अब इस फैसले ने गहलोत सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं क्योंकि ये मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति को दर्शाता है।

भाजपा का तगड़ा हमला
मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति का पर्याय प्रतीत होने वाला राजस्थान सरकार के इस फैसले के बाद भाजपा ने गहलोत सरकार पर हमला बोला है। इस मुद्दे पर भाजपा नेता और पार्टी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा, “महिला उत्पीड़न और दलितों पर बढ़ते अपराध के मामलों के बीच, राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए राजस्थान की कांग्रेस सरकार की अद्भुत साम्प्रदायिक पहल…। मदरसों को मिलेगा सरकार की तरफ से दीपावली बोनस। 15-25 लाख रुपए प्रति मदरसा! राजस्थान की जनता के टैक्स का बेहतरीन सदुपयोग।”

गौरतलब है कि पिछले लंबे वक्त से राजस्थान के बढ़ते अपराध के ग्राफ पर सभी ने चुप्पी साध रखी है। लखीमपुर की घटना से लेकर हाथरस की घटनाओं के मुद्दे पर तो कांग्रेस हमलावर थी, लेकिन राजस्थान के अपराधों पर पार्टी चुप्पी साध बैठ जाती है। इतना ही नहीं राजस्थान में कुछ वामपंथी मीडिया वर्ग ने भी मामलों को दबाने के खूब प्रयास किए। इसके विपरीत अब राज्य सरकार चर्चा में है, तो मुद्दा राजस्थान की लचर कानून व्यवस्था का नहीं, अपितु मुस्लिम तुष्टीकरण का है, जो कि कांग्रेस को ही कठघरे में खड़े करने वाली स्थिति है।

Comments