देश बेच कर अमीर होते ये नमकहराम, ये गद्दार,ये देशद्रोही कांग्रेसी 3600 करोड़ का घोटाला

कांग्रेस सरकार के समय अगस्ता वेस्टलैंड से वीवीआईपी के लिए 12 हेलिकॉप्टरों की खरीद का सौदा हुआ था। यह सौदा 3,600 करोड़ रुपए का था। इसमें 360 करोड़ रुपए की रिश्वतखोरी की बात सामने आई जिसके बाद यूपीए सरकार ने सौदा रद्द कर दिया। – एसपी त्यागी सहित 13 लोगों पर केस दर्ज किया गया था। जिस बैठक में हेलिकाॅप्टर की कीमत तय की गई थी, उसमें यूपीए सरकार के कुछ मंत्री भी मौजूद थे। इस कारण कांग्रेस पर भी सवाल उठे थे। इस फैसले में कांग्रेस के कई नेताओं के नाम भी लिए हैं।

अप्रैल २०१४ में इटली के एक न्यायालय के फैसले के अनुसार अगस्ता सौदे में घोटाला हुआ था। अदातल ने कंपनी फिनमेक्कनिका को दोषी पाया है। एक अंग्रेजी समाचार पत्र में छपी खबर के अनुसार, कोर्ट ने अपने आदेश में फिनमैकेनिका की अधीनस्थ कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड के पूर्व सीईओ ब्रूनो स्पैगनोलिनि को भी साढे़ चार साल जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में ओरसी को कोर्ट से राहत देने वाले आदेश को बदल भी दिया। भारतीय रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, ओरसी को मिली सजा से अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में कंपनी के खिलाफ भारत का केस मजबूत होगा। इस फैसले में भारत के तत्कालीन एयर चीफ का नाम भी लिया गया है।

इसके पूर्व इटली की एक अदालत ने मई 2014 में इटली के बैंकों में जमा 1818 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी भारत को लेने की अनुमति दे दी थी। इस पर अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की शरण में चली गई और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति बी एन श्रीकृष्ण को मध्यस्थ के तौर पर नामित किया। इस पर भारत ने न्यायमूर्ति बी पी जीवन रेड्डी को दूसरा मध्यस्थ नियुक्त किया। सितंबर 2014 में जब दोनों पक्ष तीसरे मध्यस्थ पर सहमत नहीं हुए तो अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने प्रोफेसर विलियम पार्क को मामले के निपटारे के लिए नियुक्त किया।

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले ( AgustaWestland Scam ) में लगातार सवालों के घेरे में रही कांग्रेस के लिए एक बार फिर से मुश्किलें बढ़ने वाली है। इस घोटाले में अब कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं के नाम सामने आए हैं, जिसके बाद से सियासी गलियों में फिर भूचाल आ गया है।

दरअसल, अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले के मुख्य आरोपी और चार्टर्ड अकाउंटेंट राजीव सक्सेना ( Rajiv Saxena ) ने पूछताछ में खुलासा करते हुए मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ के बेटे बकुल नाथ, भतीजे रतुल पुरी, सलमान खुर्शीद और अहमद पटेल का नाम लिया है।

इस खुलासे के बाद से अब एक बार फिर कांग्रेस पर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। सक्सेना के बयान का ब्यौरे से यह संकेत मिलते हैं कि अगस्ता वेस्टलैंड सौदे में कथित रूप से किस तरह की कमियां रही हैं। बता दें कि 3,000 करोड़ रुपये के अगस्ता वेस्टलैंड VVIP चॉपर डील केस में तीन हफ्ते पहले ही राजीव सक्सेना को अंतरिम जमानत दी गई है।

अगस्ता-वेस्टलैंड घोटाला मामले में मुख्य गवाह चार्टर्ड अकाउंटेंट राजीव सक्सेना ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पूछताछ में बताया है कि किकबैक को किन माध्यमों से और किन कंपनियों में निवेश के जरिए लेनदेन किया गया। साथ ही रक्षा दलाल सुषेण मोहन गुप्ता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के भतीजे रतुल पुरी के रोल के बारे में भी खुलासा किया है। राजीव सक्सेना को ED ने दुबई से प्रत्यर्पित कर उसकी 385 करोड़ रुपए की संपत्ति को अटैच किया था।

फ़िलहाल वो जमानत पर बाहर है। वो इस मामले को लेकर पूरी तरह से तथ्यों का खुलासा नहीं कर रहा है, इसीलिए ED उसे अप्रूवर से हटाना चाहती है। ED को पता चला है कि राजीव सक्सेना की कम्पनी को क्रिस्चियन मिशेल की कम्पनी से 0.94 मिलियन डॉलर (7 करोड़ रुपए) का निवेश प्राप्त हुआ। इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीज में सक्सेना की 99.9% हिस्सेदारी थी। मिशेल को दिसंबर 2018 में प्रत्यर्पित किया गया था और वो फ़िलहाल जेल में है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के अनुसार, मॉरीशस से प्राप्त हुए दस्तावेजों को जब राजीव सक्सेना को दिखाया गया तो उसने इसे स्पष्ट धोखाधड़ी करार दिया, लेकिन वो भी इसका हिस्सेदार था। इसी तरह सुषेण मोहन गुप्ता ने डीएम पावर और डीएम साउथ इंडिया हॉस्पिटैलिटी नामक दो कंपनियों में निवेश किया। राजीव सक्सेना की कम्पनी मैट्रिक्स ग्रुप लिमिटेड ने अपनी सब्सिडियरी कम्पनी रीगल पावर लिमिटेड के माध्यम से ऑप्टिमा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड में निवेश किया।

ये वही रुपए थे, जिन्हें इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और ग्लोबल सर्विसेज FZC ने दिए थे। ग्लोबल सर्विसेज FZC के बारे में राजीव सक्सेना का कहना है कि उससे मिले पेमेंट को ही रतुल पुरी ने निवेश के लिए व्यवस्थित किया था। सक्सेना का कहना है कि वो उस समय इस बात से अनजान था कि इस कम्पनी को भी अगस्ता-वेस्टलैंड से फंड्स मिले थे। गुप्ता, पुरी और सक्सेना विभिन्न निवेशों और कारोबार के बारे में भी विचार-विमर्श कर रहे थे।

कई व्यापारिक प्रस्तावों पर विचार करते समय तीनों ने ‘मोज़र पावर’ के सोलर पैनल प्रोजेक्ट्स में कारोबार का मन बनाया था और इसके सप्लायर्स के बीच दलाल के रूप में काम करने का खाका तैयार किया था। सक्सेना ने एक फ्लो चार्ट भी ED को दिखाया, जिससे पता चलता है कि उसकी कम्पनी मिडास मेटल्स इंटरनेशनल लिमिटेड ने इस मामले में दलाल की भूमिका निभाई थी। इसके अलावा पुरी की कम्पनी ऑप्टिमा इंफ्रास्टक्टर लिमिटेड में भी निवेश की योजना बनाई गई थी।
 
इस अवैध हवाला नेटवर्क को आगे बढ़ाते हुए इस कम्पनी ने हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट्स में निवेश किया। मॉरीशस में रतुल पुरी ने कुल 50 मिलियन डॉलर (372.56 करोड़ रुपए) के निवेश की योजना बनाई थी, जिनमें से इन दलालों को 10% निवेश करना था। बाकी के निवेश के लिए कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से बातचीत की गई थी। 2 से 6 साल के बीच ‘मोजर पॉवर’ और मिडास मेटल्स के बीच 240 मिलियन डॉलर (1788.3 करोड़ रुपए) का कारोबार हुआ था।

हालाँकि, जब निवेश की योजना परवान नहीं चढ़ पाई तो फिर इन दलालों को 1 मिलियन डॉलर (7.451 करोड़ रुपए) का पेमेंट नहीं मिला। चूँकि उनकी गलतियों के कारण ये डील नहीं रुकी थी, इसीलिए बाद में उन्हें कई हवाला कंपनियों के माध्यम से पेमेंट्स दिए गए। घाटे को भरने के लिए रतुल पुरी की कम्पनी इक्वीनोक्स ओसियन होल्डिंग्स लिमिटेड की वित्तीय सम्पत्तियों को मैट्रिक्स कम्पनी को 2014 में ट्रांसफर किए जाने की योजना बनी।

राजीव सक्सेना ने बताया कि इस दौरान उन्हें प्रिस्टिन रिवर नामक कम्पनी से भी पेमेंट्स मिलते थे, जो कमलनाथ के बेटे बकुल नाथ द्वारा नियंत्रित है। रतुल पुरी के एकाउंट्स से 20 मिलियन डॉलर (149 करोड़ रुपए) इस कम्पनी को ट्रांसफर किए गए थे, जहाँ नितिन भटनागर नामक व्यक्ति का नाम लिखा था। भटनागर ने भी पूछताछ में बताया कि उसे रतुल पुरी से सक्सेना ने ही मिलवाया था। उस समय भटनागर एक बैंक का मैनेजर था, जिसने बाद में खुद की कम्पनी खोल ली।

उससे पहले वो बकुल नाथ की कम्पनी का मैनेजर था। 2011-12 में प्रिस्टिन रिवर कम्पनी को 18 मिलियन डॉलर (134.12 करोड़ रुपए) का पेमेंट दिया गया। सिंगापुर की जाँच एजेंसियों ने इस पेमेंट के स्रोत पर प्रश्नचिह्न भी खड़ा किया था। भटनागर ने आरोपों से इनकार करते हुए जाँच एजेंसियों के साथ सहयोग की बात कही। वहीं रतुल के वकील नवीन कपिल का कहना है कि ED को खुद राजीव सक्सेना पर भरोसा नहीं है, उसकी बातें भ्रामक हैं और उसे अप्रूवर से हटाया जा रहा है।

सीबीआई ने सितम्बर 17, 2020 को दायर की गई चार्जशीट में बताया है कि 2000 में सक्सेना के पास इंटरस्टेलर टेक्नोलॉजीज के 99.9% शेयर्स थे। उसने गौतम खेतान के साथ मिल कर अपनी कम्पनी के बैंक खाते में अगस्ता-वेस्टलैंड से 12.4 मिलियन यूरो प्राप्त किए थे। इसके बाद इस रकम को आगे दलालों, नेताओं और अधिकारियों में बाँटे गए। उसने रक्षा मामलों के दलाल सुषेण मोहन गुप्ता और कमलनाथ के भतीजे रतुल पुरी की इस लेनदेन में प्रमुख भूमिका बताई।

कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी के खिलाफ दिल्ली की एक अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया है। इसके मुताबिक रतुल पुरी ने अमेरिका के एक नाइटक्लब में एक ही रात में 1.1 मिलियन डॉलर यानी करीब 7.8 करोड़ रुपए फूँक दिए थे।

बता दें कि चार्जशीट में रतुल पुरी के अलावा उनके सहयोगी और मोजर बेयर इंडिया (प्राइवेट) लिमिटेड (MBIL) का भी नाम शामिल है। पुरी मोजर बेयर के कार्यकारी निदेशक हैं। ईडी ने चार्जशीट में कहा है, “लेनदेन का सत्यापन किया गया और यह पता चला कि लेनदेन के पैसे का इस्तेमाल भारत और विदेशों के तमाम महँगे होटलों में ऐशो-आराम पर खर्च किए गए। प्रोवोकेटर नाम के एक नाइट क्लब में रतुल पुरी ने एक रात में 11,43,980 डॉलर खर्च कर डाले।”

एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि नवंबर 2011 और अक्टूबर 2016 के बीच पुरी का निजी खर्च 4.5 मिलियन डॉलर यानी 32 करोड़ रुपए रहा है। चार्जशीट में आकलन किया गया है कि पुरी ने लगभग 8,000 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग की है, जो शुरुआती अनुमान से काफी ज्यादा है।

ईडी का कहना है कि MBIL ने बैंकों से लिए गए लोन को आसानी से खत्म करने के लिए कंपनियों का एक बेहद ही पेचीदा ढाँचा तैयार किया था। ईडी ने अपनी जाँच में ‘शेल कंपनियों’ के जाल पर विशेष गौर फरमाया है, जिनके जरिए हवाला का सारा खेल रचा गया। चार्जशीट में दर्जनों सहयोगी कंपनियों का जिक्र है, जिनके मार्फत फंड को डायवर्ट किया गया।

Comments