हाथरस मामले में इस्लामवादी समूह PFI का कनेक्शन आया सामने, बड़ी साजिश को अंजाम देने की थी योजना

योगी सरकार ने पानी फेर दिया...

हाथरस मामले में जिस प्रकार से दंगाइयों के कनेक्शन खुलकर सामने आ रहे हैं, उससे यह साबित करना कठिन नहीं होगा कि योगी सरकार ने यूपी को जलाने की एक बेहद सुनियोजित साजिश को विफल किया है। हाल में एक सनसनीखेज खुलासे में ये सामने आया है कि हाथरस में दंगे भड़काने के इरादे से जो चार उग्रवादी पकड़े गए थे, वे दिल्ली में दंगे भड़काने वाली पीएफ़आई के सदस्यों से भी निरंतर संपर्क में थे।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, “हाथरस केस में हिरासत में लिए गए कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआइ) के सदस्य मसूद समेत तीन अन्य से पूछताछ में उनके तार दिल्ली दंगे से भी जुड़ने की बात सामने आई है”। बता दें कि सीएफआइ, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआइ) से ही जुड़ा संगठन है। प्रारंभिक जांच में चौकाने वाली बात सामने आई है कि मसूद समेत उसके कुछ साथी हाथरस केस में भी माहौल बिगाड़ दंगे कराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। इनकी हाथरस कांड के दौरान लगातार पीएफआइ के पदाधिकारियों से बातचीत हुई थी।

इसी रिपोर्ट में आगे कहा गया, “ये सभी पीएफआइ के उन पदाधिकारियों के संपर्क में थे जो दिल्ली दंगे की साजिश रचने व फंडिंग करने के मामले में आरोपित हैं और गिरफ्तार भी हो चुके हैं। ऐसे में केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय व यूपी पुलिस समेत अन्य एजेंसी पीएफआइ के सचिव मोहम्मद इलियास से भी हाथरस मामले को लेकर पूछताछ कर सकती है”। बता दें कि मोहम्मद इलियास पर पूर्वोत्तर दिल्ली में दंगे भड़काने के भी आरोप लगे है, जिसके संबंध में उन्हें पहले दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिया जा चुका है।

हाथरस मामले में जैसे ही पीड़िता की मृत्यु की खबर सामने आई, कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों के कई सदस्य अराजकता फैलाने के इरादे से हाथरस में डेरा जमाना चाहते थे। लेकिन योगी सरकार ने उनकी एक नहीं सुनी, और पहले मामले की एसआईटी द्वारा जांच पूरी होने तक घटनास्थल में प्रवेश पर पाबन्दियाँ लगाई। इसके बाद मामला सीबीआई को सौंपते हुए योगी सरकार ने सभी पक्षों के नार्को टेस्ट का निर्देश भी दिया।

इसी बीच PFI के 4 सदस्यों की गिरफ्तारी के पश्चात ये बात सामने आई कि हाथरस के मुद्दे को भी पूर्वोत्तर दिल्ली के दंगों की भांति हिंसक रूप देने की साजिश रची जा रही थी, जिसे योगी सरकार की सतर्कता ने तुरंत रोक दिया। ऐसे में पीएफ़आई जिस प्रकार से भारत के लिए अब एक नए खतरे के रूप में उभर कर सामने आ रही है, उसपर केंद्र सरकार को अब अधिक ध्यान देने की आवश्यकता आन पड़ी है।

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