“वो मम्मी-पापा से बिछड़ रहे हैं” रोते सैनिकों की Video जारी करने के लिए चीनी मीडिया ने ताइवान पर बोला हमला

ताइवान की मीडिया ने चीन को वहाँ मारा, जहां उसे चोट सबसे ज़्यादा होती है

चीन और ताइवान में जंग छिड़ गई है। नहीं नहीं, ये जंग चीन के फाइटर जेट्स द्वारा निरंतर घुसपैठ को लेकर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक वीडियो को लेकर है। दरअसल, सोशल मीडिया पर रोते हुए चीनी सैनिकों की वायरल वीडियो को लेकर चीनी और ताइवान मीडिया के बीच वाक्युद्ध छिड़ गया है।

बता दें कि कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हुई थी। इस वीडियो में चीन के अन्हुई प्रांत से सीमा के लिए निकल रहे जवान एक चीनी गाना गाते हुए दिखाई दे रहे हैं। बस में सवार ये चीनी सैनिक अपने भावनाओं को नियंत्रण में नहीं रख पाये और इस वीडियो में वे बिलख-बिलख के रोते हुए दिखाई दिये। ये स्पष्ट नहीं है कि वीडियो में उपस्थित सैनिक किस मोर्चे के लिए निकल रहे थे, लेकिन ताइवान न्यूज़ का मानना है कि ये सैनिक, जो अभी-अभी कॉलेज से निकले हैं, भारत-तिब्बत बॉर्डर के लिए निकल रहे थे ।

इस वीडियो के वायरल होते ही चीनी सैनिकों को सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया गया और ताइवान की मीडिया ने चीनी सैनिकों की खिंचाई करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अपने स्वतन्त्रता समर्थक न्यूज़ कवरेज के लिए प्रसिद्ध लिबर्टी टाइम्स और ताइवान न्यूज़ का मानना था कि चीनी सैनिक इसलिए रो रहे हैं, क्योंकि उन्हें भारत-तिब्बत बॉर्डर पर तैनात होने से डर लग रहा है। ताइवान न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, “इस विडियो में देखा जा सकता है कि कैसे चीनी सैनिक इतना रो रहे हैं कि वे पीएलए का गीत ‘ग्रीन फ्लावर्स इन द आर्मी’ भी ढंग से नहीं गा पा रहे हैं।”

परंतु ताइवान मीडिया की इस कवरेज से चीन बुरी तरह बिलबिला गया। अपनी पोल खुलने पर चीनी प्रशासन की बौखलाहट ग्लोबल टाइम्स के रिपोर्ट में स्पष्ट दिख रही थी। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, “जब ये वीडियो बनाई गई थी, तब वे [पीएलए सैनिक] अपने अभिभावकों को अलविदा कह रहे थे और वे चीनी सेना का प्रसिद्ध गीत ‘ग्रीन फ्लावर्स इन द आर्मी’ एवं ‘अपने काम का उत्सव मनाकर घर जाओ’ जैसे गीत गा रहे थे, और उनका मूड बिलकुल भी वैसा नहीं था जैसा कि ताइवान की मीडिया आपको दिखाना चाहती है।”

इस रिपोर्ट में आगे यह भी लिखा था, “ताइवान की मीडिया ने साम दाम दंड भेद अपनाते हुए पीएलए के योद्धाओं को ‘युद्ध से भागने वाले’ के रूप में दिखाने का भरपूर प्रयास किया, क्योंकि पूरी जानकारी को बताने के लिए रिपोर्ट के लेखक ने ‘कहा गया है’ और ‘संभव है’ जैसे टर्म्स का प्रयोग किया, जो उनके अपराध को सिद्ध करती है। दिलचस्प बात तो यह है कि इस वीडियो के जरिये चीनी सैनिकों का मज़ाक उड़ाने के लिए इसे भारतीयों ने सबसे ज़्यादा रिपोस्ट किया।”

इस रिपोर्ट से चीन की बात सिद्ध होने के बजाए उसकी पोल अधिक खुल रही है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों में पीएलए के सैनिकों के बारे में जितनी भी खबरें आ रही है, उन्हें सकारात्मक तो कतई नहीं कहा जा सकता। अभी सर्दियाँ शुरू भी नहीं हुई है, और चीनी सैनिक अभी से ही अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं।

इसके अलावा यदि चीन वाकई में शक्तिशाली है और उसका कोई तोड़ नहीं है, तो वो पाकिस्तान की तरह गलवान घाटी में मारे गए चीनी सैनिकों की वास्तविक संख्या बताने से क्यों हिचकिचा रहा है? सच्चाई यही है कि ताइवान की मीडिया ने एक बार फिर चीनी सैनिकों की पोल खोली है, और चीन के पास बिलबिलाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं रह गया है।

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