सन्यासी ऐसे ही तो काम करते हैं- UP को भ्रष्टाचार मुक्त करने का योगी का तरीका लाजवाब है

UP में या तो योगी की चलेगी या फिर योगी की चलेगी!

उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ के सख्त रवैए के कारण पिछले एक महीने में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ थोक में एक्शन लिया जा रहा है। पुलिस विभाग से लेकर भ्रष्टाचारी सभी विभागों अधिकारी तक मुख्यमंत्री समेत प्रशासन की आंखो में खटक रहे हैं। इसी कारण मामलों की जांच के साथ ही प्रदेश में लगभग हर दिन भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी नई कार्रवाई का जिक्र अखबारों की हेडलाइन बनता है। लंबे वक्त से दबे पड़े इन सभी करप्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करके योगी सरकार ने ये दिखाया है कि आखिर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का सही तरीका क्या है।

यूपी में परिवहन समेत बैंकिंग घोटाले का मामला सामने आने के बाद प्रशासन की सख्त कार्रवाइयां शुरू हो गई हैं। गौरतलब है कि इस मामले के तार मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित कैनरा बैंक की एक ब्रांच से भी जुड़े हैं। मामले की सीबीआई जांच में दोषी पाए गए तीनों आरटीओ अधिकारियों को कार्य में अनियमितता और लापरवाही के तहत निलंबित कर दिया गया है।

यही नहीं यूपी के परिवहन मंत्री अशोक कटारिया ने ये भी बताया कि है इस पूरे खेल में कैनरा बैंक की उस ब्रांच के मैनेजर के खिलाफ भी मामले की जांच जारी है जिसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ट्रकों के लिए लोन दिया।‌ ये सभी संभागीय अधिकारी बनारस, औरैया और मऊ के हैं। इसके अलावा झांसी के भी दो आरटीओ अधिकारियों के खिलाफ प्राइवेट नंबरों के नेक्सस को लेकर मुख्यालय से संबद्ध और अनुशासनिक कार्रवाइयां की गई हैं।

योगी आदित्यनाथ की सरकार किस तरह से भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर लोगों की सुनवाई कर एक्शन ले रही है उसका पर्याय महोबा के पुलिस अधीक्षक मणिलाल पाटीदार पर की गई कार्रवाई भी है। ये लंबे वक्त से उस इलाके में अवैध वसूली और मोटर मालिकों को प्रताड़ित कर रहे थे। उनके खिलाफ एक व्यापारी ने सोशल मीडिया पर भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया है और इसके बाद उसे किसी शख्स द्वारा मार दिया गया। जिसके बाद से पुलिस अधीक्षक का कोई अता-पता नहीं है। भ्रष्टाचारी अधिकारी की स्थिति ऐसी है कि वो अब पुलिस और प्रशासन से छिपते फिर रहे हैं जबकि प्रशासन उन्हें निलंबित कर उसकी खोज में जुट गया है।

प्रयागराज में लगातार बढ़ते अपराध को लेकर जब मुख्यमंत्री का हंटर चला तो इसकी जद में एसएसपी अभिषेक दीक्षित भी आ गए। योगी प्रशासन ने इनकी तैनाती की अवधि से जुड़ी अनियमितताओं और जिले में अपराध कंट्रोल न कर पाने के चलते निलंबन के साथ ही उन्हें डीजीपी कार्यालय में अटैच कर दिया है। यही नहीं अभिषेक दीक्षित को लेकर एक बड़े ट्रांसफर और पोस्टिंग मामले का भंडाफोड़ हुआ है जो बताता है कि पिछले तीन महीनों में दो दर्जन से ज्यादा थानेदारों से लेकर न अनेकों सिपाहियों के तबादले किए गए। आईजी रेंज ने जब दरोगा की तैनाती को लेकर उंगली उठाई तो इस खेल के पत्ते खुलने लगे और फिर इस मामले को लेकर थानों में निलंबन और लाइन हाजिर की प्रकिया शुरू हुई है जो कि अभी भी जारी है।

इस पूरे मामले का संज्ञान लेने के बाद जिस तरह इस आईपीएस अधिकारी को तलब किया गया उसने भ्रष्टाचारियों की नींद उड़ा रखी है। अभिषेक दीक्षित पर सरकार का भड़कना इसलिए भी लाज़मी माना जा रहा है कि वो अतीक अहमद जैसे गैंगस्टर के 18 साल पुराने केस की फाइल के गायब होने पर बेतुके तर्क दे रहे थे क्योंकि उनके पास इसको लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं था।

ये तो केवल पिछले दो तीन हफ्तों की कार्रवाई के चंद उदाहरण हैं। वो सरकारी अधिकारी जो पिछली सरकारों में मलाई खा रहे थे। उनके खिलाफ सीएम जबरदस्त एक्शन ले रहे हैं। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करें तो पिछले 3 वर्षों में करीब 325 अधिकारों को जबरदस्ती उनकी कार्यप्रणाली के आधार पर रिटायर किया गया। वहीं करीब 450 कर्मचारियों को निलंबन के साथ डिमोशन भी मिला है। भ्रष्ट अधिकारियों को ढूंढकर उन पर कार्रवाई के लिए एक विभागीय स्क्रीनिंग कमेटी बनी है। ऐसा पहली बार हुआ है कि अक्षमता और भ्रष्ट रवैए के कारण इतने सारे अफसरों को जबरन रिटायर किया गया है जो कि भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार की कार्रवाई की नजीर है।

योगी सरकार का ये डंडा केवल पुलिस और परिवहन विभाग पर ही नहीं चला है, बल्कि उर्जा, पंचायती राज, गृह, बेसिक शिक्षा, वन, मनोरंजन कॉमर्शियल टैक्स, श्रम पीडब्ल्यूडी, वित्त, ग्राम विकास, राजस्व के विभागों के अधिकारियों की छंटनी पर उन्हें जबरन रिटायरमेंट से लेकर उनके निलंबन तक किए हैं। ये सभी वो विभाग है जिन्हें मलाईदार कहा जाता है ऐसे में इनके अधिकारियों पर हुई कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि योगी यूपी भ्रष्टाचार की जड़ो को उखाड़ फेंकने में सजगता से लगे हुए हैं।

भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन में योगी सरकार का ये रुख उन पूर्व पूर्वमुख्यमंत्रियों समेत नेताओं के लिए एक सबक भी है कि असल में करप्शन के खिलाफ एक्शन कैसे लिया जाता है।

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