“भारत वाले कभी भी घुस सकते हैं”, PLA के रिटायर्ड जनरल ने चीन में खतरे की घंटी बजा दी है

ये सुनकर अस्पताल के Bed पर तैनात चीनी सैनिकों के होश उड़ना तय है!

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन (China) की सेनाओं के बीच तनातनी मानो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। दोनों देशों के कूटनीतिज्ञों द्वारा शांति को लेकर बातचीत के बावजूद पीएलए अपनी ओर से मोर्चे से हटने को तैयार नहीं है, और ऐसे में भारत किसी भी प्रकार की घटना के लिए पहले से पूरी तरह तैयारी करके बैठा हुआ है। अब एक सनसनीखेज खुलासे में एक पूर्व पीएलए जनरल ने चीन को चेतावनी दी कि यदि वह समय रहते न चेता, तो भारत इतना सक्षम है कि उसकी सेनाएँ कुछ ही घंटों में चीन (China) में प्रवेश कर चीनी खेमे में तांडव कर सकते हैं।

ली जियान नामक ऑनलाइन पोर्टल पर प्रकाशित एक लेख में चीनी पीएलए के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल वांग होंगगूआंग ने लिखा, “जैसा लोग सोचते हैं, उसके उलट भारत को पूरे एलएसी की रक्षा हेतु केवल 50000 सैनिकों की आवश्यकता है, और इस दिशा में उसने 1 लाख से अधिक सैनिकों को लद्दाख में तैनात किया है, सेना को पीछा हटाना तो दूर की बात है”। अपने लेख में आगे वे लिखते हैं, “भारत ने एलएसी के पास अपनी सेना को दोगुनी ही नहीं, तिगुना भी किया है, और जिस तरह से वे तैनात है, वे चीन (China) में कुछ ही घंटों में प्रवेश कर तांडव मचा सकते हैं। ऐसे में चीन को भारत के सरप्राइज़ हमलों को लेकर सतर्क हो जाना चाहिए, और पीएलए नवंबर से पहले राहत की सांस नहीं ले सकता”।

लेफ्टिनेंट जनरल वांग गलत भी नहीं है, क्योंकि भारतीय सेना ने सर्दियों में चीन (China) द्वारा संभावित आक्रमण के लिए पूरी तरह से तैयारी कर ली है, और इसी दिशा में कई हफ्तों पहले पूर्व आर्मी अफसर, लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने कहा था, “इस समय भारत को धैर्य की आवश्यकता है। यदि भारत ने सितंबर तक एलएसी पर धैर्य बनाए रखा, तो अक्टूबर के पश्चात चीन द्वारा उठाया गया कोई भी कदम अंत में उसी के लिए घातक सिद्ध होगा”।

ऐसे में पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल वांग ने चीन को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत की सेना को हल्के में लेने की भूल न करें। उन्होंने ये बात यूं ही नहीं कही है। भारत के पास चाहे संसाधन हो या नहीं, लेकिन शत्रु को आसान विजय कभी भी नसीब नहीं होने दी है। 1962 में राजनीतिक कारणों से भले ही भारत को युद्ध में हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन चीन (China) जितना गर्व से 1962 की बात करता है, उतने ही कायरता से वह 1967 की कुटाई के बारे में बात करने से कतराता है। जहाँ नाथु ला की विजय से भारतीयों के मन में चीन के प्रति डर कम हुआ, तो वहीं सिक्किम के Cho La में भारतीय सैनिकों ने चीन को ऐसा कूटा, ऐसा कूटा, कि आज भी चीन ने उस मोर्चे से कभी भी भारत में घुसपैठ की बात तो दूर, वहां तनातनी बढ़ाने की भी हिमाकत नहीं कर पाया है।

भारत इस समय कूटनीतिक और रणनीतिक रूप से एलएसी के विषय पर लाभकारी स्थिति में है। चीन के एक भी आक्रमण का अर्थ है कि अमेरिका और रूस समेत दुनिया की सभी बड़ी शक्तियाँ चीन (China) के विरुद्ध भारत का साथ देने के लिए तैयार खड़ी है, और पिछले एक महीने में भारत ने चीन के आक्रमणों को ध्वस्त कर जितने भी रणनीतिक रूप से अहम पोस्ट्स को पुनः प्राप्त किया है, उससे अब चीन के किसी भी गतिविधि पर, विशेषकर पूर्वी लद्दाख में भारत नज़र रख सकता है, और ऐसे में यह लद्दाख के गोस्थान क्षेत्र यानि अक्साई चिन को भी चीन के कब्जे से छुड़ाने का सबसे सुनहरा अवसर है।

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