फेल हो गया चीन का प्रोपगंडा J 20 निकला 3RD GEN, राफेल के आगे मरे कुत्ते जैसी हालत

चीन का यह पुराना तरीका है प्रोपगंडा का,आप चीन की फिल्में देखे जहां हीरो जमीन फाड़ देगा आसमान चीर देगा अकेला पूरी दुनिया को घुमा देगा 100 से ज्यादा अंग्रेजो को कालो को मारेगा फिर जीत कर दुनिया बचा लेगा।

विशेषज्ञ बताते हैं चीन का ज्यादातर सामान इसी धूमधड़ाके में बिक जाता है पर सिर्फ दिखने का होता है सच मे उसमें कोई दम नही होता।

राफेल के साथ भारतीय वायुसेना की बढ़ती ताकत के बाद चीन के माथे पर पड़ी शिकन को आसानी से महसूस किया जा सकता है। यूं तो चीन लगातार अपनी सैन्‍य क्षमता को बढ़ा रहा है और उसको आधुनिक कर रहा है। लेकिन जानकार मानते हैं कि उसका ये आधुनिकीकरण जमीनी हकीकत से काफी दूर है। आपको बता दें कि कुछ समय पहले चीन ने अपने लड़ाकू विमान जे-20 को स्‍वदेशी को स्‍टील्‍थ और 5 वीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान बताकर उसका प्रचार प्रसार भारत को डरान के लिए किया था। लेकिन भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ऐसा नहीं मानते हैं।

रिटायर्ड एयर मार्शल अनिल चोपड़ा के मुताबिक चीन काफी समय से अपने लड़ाकू विमानों के लिए एक इंजन बनाने की कवायद कर रहा है लेकिन इसमें उसको आज तक सफलता हाथ नहीं लगी है। उनके मुताबिक चीन के लड़ाकू विमानों में रूस के लड़ाकू विमानों का इंजन लगा है। इसके अलावा उन्‍होंने बताया कि चीन का वर्तमान में प्रमुख फाइटर जेट जे-10 है। इसको उन्‍होंने उन्‍होंने लद्दाख से कुछ दूरी पर मौजूद अपनी एयर फील्‍ड पर तैनात किया है। ये फाइटर जेट एफ-16 का पुराना वर्जन है। इसके अलावा जो फाइटर जेट चीन ने अब तक अपना स्‍वदेशी बताकर तैनात किए हैं वो सभी सुखोई-30 की ही नकल हैं। इनमें जे-11, जे-15 और जे-20 शामिल है। इनमें से कोई भी इससे बेहतर नहीं है। कुछ समय पहले चीन के पास सुखोई-35 लड़ाकू विमान आया है। इसकी दो स्‍क्‍वार्डन चीन के पास मौजूद हैं। ये भी मिग 230 के बराबर ही गिना जाता है।

आपको बता दें कि कुछ समय पहले जे-20 को अपनी वायु सेना का हिस्‍सा बनाया है। इसको एक स्‍टील्‍थ फाइटर जेट बताया गया है। स्‍टील्‍थ फाइटर जेट खुद को दुश्‍मन से छिपाकर हमला करने की काबलियत रखता है। इनमें वो तकनीक होती है जो दुश्‍मन के राडार पर इसको नजर नहीं आने देती है और ये अपना काम बखूबी अंजाम देकर वापस लौट आता है। हालांकि पूर्व वायुसेना अधिकारी एयर मार्शल चोपड़ा चीन के इस फाइटर जेट को स्‍टील्‍थ मानने से इनकार करते हैं। उनका कहना है कि चीन ने ये महज खुद के प्रचार और प्रसार के लिए किया है। उनके मुताबिक कहने के लिए ये फाइटर जेट 5वीं पीढ़ी का है लेकिन स्‍टील्‍थ के नाम पर वो राफेल के मुकाबले काफी पीछे है। इसमें भी पुराने रूसी लड़ाकू विमानों का ही इंजन लगा है। इसका राडार सिस्‍टम भी राफेल के मुकाबले पिछड़ा हुआ है। चोपड़ा ये भी मानते हैं कि इसको पूरी तरह से ऑपरेशनल होने के लिए 5-6 वर्ष लग जाएंगे। वहीं यदि राफेल की बात करें तो ये सीरिया, इराक, अफगानिस्‍तान, लीबिया समेत कई जगहों पर अपनी काबलियत का लोहा मनवा चुका है। उनके मुताबिक 20 वर्षों के दौरान ये पांच जंग लड़ चुका है। इसका कॉम्‍बेट एक्‍सपीरियंस काफी अधिक है। लिहाजा ये कहना गलत नहीं होगा कि ये पुरानी बोतल में नई शराब पेश करने जैसा ही है।

अनिल चोपड़ा का कहना है कि 2021 के अंत तक भारत के पास राफेल के सभी 36 विमान आ जाएंगे जो वायुसेना को जबरदस्‍त मजबूती प्रदान करेंगे। उन्‍होंने इस दौरान बताया कि भारतीय वायु सेना की ऑथराइज्‍ड स्‍क्‍वार्डन 42 हैं जबकि वर्तमान में केवल 30 ही मौजूद हैं। ऐसे में उनका ये भी मानना है कि यदि भारत सरकार को राफेल हर लिहाज से बेहतर लगेगा तो आगे भी इसकी खरीद हो सकेगी। उनके मुताबिक भारतीय वायुसेना की आधुनिकता के लिए राफेल का आना बेहद जरूरी था। उन्‍होंने उम्‍मीद जाहिर की है कि आने वाले समय में भारतीय वायु सेना की सभी 42 स्‍क्‍वार्डन देखी जा सकेंगी।

पूर्व एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने शुक्रवार को चीन के उस दावे की पोल खोल दी जिसमें उसने कहा है कि उसके जे-20 लड़ाकू विमान राफेल से बेहतर हैं। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने एक ‘एक्सपर्ट’ के हवाले से कहा कि राफेल सुखोई-30 MKI जेट से बहेतर जरूर है, लेकिन J-20 के सामने नहीं टिकता।

कम्युनिस्ट पार्टी की प्रोपेगेंडा वेबसाइट ने एक कथित मिलिट्री एक्सपर्ट झांग शूफेंग के हवाले से कहा, ”यह केवल एक चौथाई जेनरेशन अडवांस है और गुणवत्ता के मामले में इसमें अधिक बदलाव नहीं हैं।” वेबसाइट ने एक अनाम एक्सपर्ट के हवाले से कहा कि राफेल केवल थर्ड प्लस जेनरेशन का फाइटर जेट है और J-20 के सामने उसकी नहीं चलेगी।”

राफेल को 4.5 जेनरेशन का फाइटर जेट बताने वाले वायुसेना के पूर्व चीफ बीएस धनोआ ने दो साधारण सवालों के जरिए चीन के दावे की पोल खोलकर रख दी। धनोआ नेपूछा, ”यदि J-20 वास्तव में पांचवी पीढ़ी का फाइटर जेट है तो इस पर कनार्ड्स क्यों हैं, जबकि अमेरिका के पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों F22, F35 और रूस की पांचवीं पीढ़ी के Su 57 में ये नहीं हैं।” कनार्ड्स विमान के नियंत्रण में सुधार के लिए मुख्य विंग के आगे लगे होते हैं।

धनोआ ने कहा, ”मैं नहीं मानता कि J-20 इतने शक्तिशाली हैं कि उन्हें पांचवी पीढी का कहा जाए क्योंकि कनार्ड रडार सिग्नेचर को बढ़ा देता है लॉन्ग रेंज के मीटीअर मिसाइलों को पोजिशन बता देता है, जो राफेल में लगे हैं।”

पूर्व वायुसेना चीफ ने चीन से दूसरा सवाल पूछा कि यदि J-20 का उत्पादतक चेंगदू एयरोस्पेस कॉर्पोरेशन इसे 5वीं पीढ़ी का फाइटर जेट बताता है तो इसमें सुपरक्रूज की क्षमता क्यों नहीं है? सूपरक्रूज वह क्षमता है जिससे फाइटर जेट आफ्टरबर्न्स का इस्तेमाल किए बिना M 1.0 (साउंड की गति) की अधिक स्पीड से उड़ सकते हैं।

धनोआ ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया, ”राफेल में सुपरक्रूज की क्षमता है और रडार सिग्नेचर की तुलना दुनिया के सबसे अच्छे फाइटर जेट्स से की जा सकती है।” धनोआ Sukhoi 30 MKI के साथ ही भारत के सभी अच्छे फाइटर प्लेन उड़ा चुके हैं। बालाकोट एयरस्ट्राइक की जिम्मेदारी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ धनोआ ने ही संभाली थी।

वायुसेना के टॉप पोस्ट से रिटायर हो चुके धनोआ ने इस सप्ताह चाइनीज प्रोपेगेंडा की धज्जियां उड़ाईं और कहा कि यदि चाइनीज हथियार वास्तव में अच्छे होते तो 27 फरवरी 2019 को राजौरी में नांगी तेकरी पुल पर हमले के लिए चीन ने अमेरिका के F-16 की जगह चाइनीज JF-17 को  चुना होता। लेकिन चीन ने JF-17 का इस्तेमाल केवल मिराज 3/5 को एयर डिफेंस कवर देने के लिए किया।

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