अंकित शर्मा की हत्या के लिए ताहिर हुसैन जिम्मेदार, घर और मस्जिद से किया दंगाइयों का नेतृत्व: अदालत

दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार (21 अगस्त, 2020) को फरवरी में हुए हिंदू विरोधी दंगों में शामिल AAP के पूर्व नेता ताहिर हुसैन के खिलाफ दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए कहा कि ताहिर हुसैन के उकसावे पर मुस्लिम हिंसक हो गए और हिंदू समुदाय पर पथराव शुरू कर दिया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत ने फरवरी में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुए हिंदु विरोधी दंगों के दौरान खुफिया (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से संबंधित मामले और दंगों को भड़काने में हुसैन की भूमिका के खिलाफ दायर आरोपपत्र का संज्ञान लेते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने आरोपितों के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट भी जारी किया और उन्हें 28 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश करने का निर्देश दिया।

हालाँकि, पुलिस ने बताया कि उन्हें हुसैन और अन्य सह-अभियुक्तों से इस मामले में संबंधित अधिकारियों से राजद्रोह के मामले में चार्ज लेने की मंजूरी मिलनी बाकी है।

मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पुरुषोत्तम पाठक ने कहा कि हालाँकि मंजूरी प्राप्त करने के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है और मामले में किसी देरी से वह मकसद पूरा नहीं होगा, जिसके लिए दंगा मामलों की सुनवाई की खातिर विशेष अदालतें बनाई गई हैं।

न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, ”मेरा विचार है कि आरोपितों द्वारा किए गए अपराधों का संज्ञान लेने के लिए रिकॉर्ड में पर्याप्त सामग्री है।”

दिल्ली पुलिस द्वारा दायर आरोप-पत्र का संज्ञान लेते हुए, अदालत ने कहा कि दिल्ली में हिंदू-विरोध दंगे एक “सुनियोजित तरीके” से हुए और इसके लिए “अच्छी तरह से साजिश रची गई।” और भीड़ के नेता ताहिर हुसैन और अन्य सह-आरोपियों द्वारा कथित तौर पर इसे बढ़ावा दिया गया।

अदालत ने कहा, “आरोपी ताहिर हुसैन ने उन्हें अपनी इमारत की छत पर जाने की सुविधा दी और अन्य सहायता प्रदान की ताकि बड़े पैमाने पर दंगे हो सकें और दूसरे समुदाय के जानमाल और संपत्ति का नुकसान हो।”

अदालत ने कहा, ”प्रथम दृष्टया आरोपी ताहिर हुसैन अपने घर से और 24 तथा 25 फरवरी को चांद बाग पुलिया के पास मस्जिद से भी भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे। अदालत ने कहा कि साजिश के तहत हसीन, नाजिम, कासिम, समीर खान, अनस, फिरोज, जावेद, गुलफाम और शोएब आलम के साथ गैरकानूनी भीड़ को इकट्ठा करने में ताहिर की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

कोर्ट ने कहा, “उन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच धर्म के आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दूसरे समुदाय के खिलाफ अपने समुदाय को उकसाया, जिसमें ताहिर ने दावा किया कि हिंदू लोगों ने कई मुसलमानों को मार दिया है और उनकी दुकानों को शेरपुर चौक पर आग लगा दी गई है और उन्हें किसी भी हिंदू को छोड़ना नहीं चाहिए।”

“उसके उकसाने और भड़काने पर, मुस्लिम समुदाय हिंसक हो गया।और 24.02.2020 और 25.02.2020 को वे हिंसक हो गए और हिंदू समुदाय पर जलते हुए पेट्रोल बमों और पत्थरों को फेकना शुरू कर दिया। वहीं उस इलाके में स्थित हिंदु घरों को भी निशाना बनाया।”

कोर्ट ने कहा “तत्पश्चात, अनियंत्रित भीड़ दंगाइयों में बदल गई और अंकित शर्मा को निशाना बनाते हुए पकड़ लिया और घसीटते हुए चांद बाग पुलिया ले जाकर उस पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। अंकित की धारदार हथियारों से क्रूर तरीके हत्या की गई थी। और सबूत मिटाने के लिए उसके शव को नाले में फेंक दिया था।”
(कोर्ट आर्डर )
चार्जशीट में नौ अन्य लोगों के साथ हुसैन को मुख्य आरोपी में नामित किया गया है। अन्य आरोपियों में अनस, फिरोज, जावेद, गुलफाम, शोएब आलम, सलमान, नजीम, कासिम, समीर खान शामिल हैं।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया था कि मुस्लिम भीड़ ने अंकित शर्मा की धारदार वस्तुओं से हत्या कर दी थी। शर्मा के शरीर पर 51 चोट के निशान पाए गए थे। चार्जशीट में कहा गया है कि शर्मा की हत्या दंगाइयों ने की थी, जिसने लोगों को दहला दिया और क्षेत्र के निवासियों के मन में एक डर पैदा कर दिया था।

आम आदमी पार्टी (आप) पार्षद ताहिर हुसैन, मुख्य रुप से दिल्ली दंगों की साजिश रचने में शामिल थे। दिल्ली पुलिस और विशेष प्रकोष्ठ द्वारा दायर आरोपपत्रों में यह बात सामने आई है कि ताहिर हुसैन ने ‘इंडिया अगेंस्ट हेट’ समूह के उमर खालिद और खालिद सैफी से मुलाकात कर दिल्ली दंगों की साजिश रची और 8 जनवरी को वापस आया। यह बैठक शाहीन बाग में आयोजित की गई थी जहाँ सीएए का विरोध हो रहा था।

चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि ताहिर हुसैन को शेल कंपनियों से इन दंगों को आयोजित करने के लिए पैसे मिलते थे। एक अन्य खुलासे में यह बताया गया कि दिल्ली दंगों के लिए धन इकट्ठा करने के लिए खालिद सैफी इस्लामवादी जाकिर नाइक से मिलने के लिए मलेशिया भी गया था।

ताहिर हुसैन ने बताया कि कैसे उन्होंने हिंदुओं से बदला लेने के लिए उसने दंगों का आयोजन किया और ‘काफ़िरों ’को सबक सिखाया। वह दंगों के बीच पीसीआर को कॉल भी करता था, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह दोषी नहीं है। इसके अलावा, उसने यह भी खुलासा किया कि दंगों को अंजाम देने के लिए उन्होंने चांद बाग इलाके में हजारों मुसलमानों को किस तरह इकट्ठा किया था।

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