स्वीडन में किशोरों के साथ बलात्कार और जिंदा दफनाने की कोशिश से भड़के थे ईसाई,स्वीडन के बाद नार्वे से भी उठी मुसलमान शरणार्थी निकालने की मांग

हिंदुस्तान के सभी मीडिया हाउस ने स्वीडन की घटना का एक पक्ष दिखाया जबकि घटना का वास्तविक पक्ष कुछ और है,जो परोसा गया वह यह है…

स्वीडन में दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने दक्षिणी शहर मालमो में पवित्र कुरान को आग के हवाले कर दिया। इस घटना के विरोध में 300 लोग एकत्र हुए जिसके बाद दंगा भड़क गया। पुलिस ने शनिवार बताया कि दंगाइयों ने शुक्रवार को आगजनी की और पुलिस तथा राहत सेवा दल को निशाना बनाया जिसमें कई पुलिस अधिकारी मामूली रूप से घायल हो गए। दंगे के आरोप में करीब 15 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

टीटी समाचार एजेंसी की खबरों के अनुसार शुक्रवार दोपहर कुरान जलाए जाने की घटना के बाद हिंसा भड़क उठी। खबरों में कहा गया कि दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने कुरान जलाने की घटना को अंजाम दिया और और इसका वीडियो बनाकर ऑनलाइन पोस्ट कर दिया।

सच यह है

हाल ही में स्वीडन के स्कॉटहोम के सोलना इलाके में एक कब्रिस्तान में दो किशोर लड़कों के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया गया, उसे यातनाएँ दी गई और फिर उसे जिंदा दफना दिया गया।

घटना शनिवार सुबह लगभग 11 बजे की है। पुलिस का कहना है कि लड़कों द्वारा एक प्रस्ताव को ठुकरा दिए जाने के बाद दोनों को कब्रिस्तान ले जाया गया। बताया जा रहा है कि अपराधी माइग्रेंट बैकग्राउंड से हैं। बता दें कि यह स्वीडन के धुर दक्षिणपंथी समूह ‘Stram Kurs’ की ओर से कुरान बर्निंग रैली आयोजित करने के विरोध में माल्मो शहर में भड़के दंगों से 6 दिन पहले की घटना है।

रात के समय अचानक से जुटे मुस्लिम दंगाइयों ने मजहबी नारों के साथ हिंसा शुरू कर दी। उनकी संख्या 300 के करीब बताई जा रही है। जब पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो उन्होंने पत्थरबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि 1 दिन पहले कुरान जलाए जाए के कारण ही ये हिंसा हुई है।

इस घटना में 21 साल के ईरानी आप्रवासी और स्वीडन में ट्यूनीशियाई पिता से पैदा हुए एक 18 साल के आरोपितों ने पीड़ित लड़कों को जबरन गड्ढे में जिंदा आंशिक रूप से दफन कर दिया था। अपराधियों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने उनके साथ बलात्कार किया। संदिग्धों पर अपहरण, हमले, डकैती और बलात्कार के आरोप लगाए गए हैं।

स्‍वीडन में इस्‍लाम विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के बाद अब इसकी आग पड़ोसी देश नार्वे तक फैल गई है। नार्वे की राजधानी ओस्‍लो में शनिवार को इस्‍लाम विरोधी और इस्‍लाम समर्थकों के बीच हिंसक प्रदर्शन हुए हैं। बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों ने मुस्लिमों की पवित्र किताब कुरान की प्रतियों को फाड़ दिया। इन प्रदर्शनों का आयोजन नार्वे के धुर दक्षिणपंथी संगठन स्‍टॉप इस्‍लामाइजेशन ऑफ नार्वे (SIAN) ने किया था।

ये प्रदर्शनकारी नार्वे की राजधानी ओस्‍लो में संसद की बिल्डिंग के बाहर इकट्ठा हुए और इस्‍लामी विचारधारा के ख‍िलाफ अपना विरोध जताया। बताया जा रहा है कि यह प्रदर्शन करीब दो घंटे तक चला। स्‍टॉप इस्‍लामाइजेशन ऑफ नार्वे के नेता लार्स थोर्सन ने इस्‍लाम विरोधी कई बयान दिए। उन्होंने पैगंबर के बारे में ऐसी बातें कहीं है जो मुस्लिम समुदाय को नागवार गुजर सकती है। इस दौरान संस्‍था के समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की और गाने गाए।

उधर, स्‍टॉप इस्‍लामाइजेशन ऑफ नार्वे के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए इस‍के विरोधी भी वहां पर जमा हो गए लेकिन पुलिस ने तत्‍काल ऐक्‍शन लेते हुए उन्‍हें रोक दिया। इससे दोनों ही गुट एक-दूसरे से काफी दूर रहे। इस बीच स्‍टॉप इस्‍लामाइजेशन ऑफ नार्वे की एक सदस्‍य ने कुरान निकाली और उसकी प्रतियां फाड़ डाली। इसे दूसरी तरफ मौजूद इस्‍लाम समर्थकों ने देख लिया और विरोध प्रदर्शन आक्रामक हो गया।

Comments

  1. To be frank Islam is not a religion. If this is a religion it must be called anti religion because it teaches and professes hatred, bigotry and cruelty etc nothing else should be stop us to dub it a religion practiced by devil and monsters since its inception in 7th century it wrought havoc against non Muslims which they called infidels. So the better we get rid of this religion of terror the better for the civilized society of India and the world at large.

    ReplyDelete

Post a Comment