बेंगलुरु दंगों में शामिल 40 आरोपितों के आतंकी संगठनों से कनेक्शन: RSS कार्यकर्ता की हत्या और बम विस्फोटो से लिंक भी आया सामने

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में 11 अगस्त की रात हुए दंगों की जाँच में आतंकी कनेक्शन भी सामने आ रहे हैं। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दंगों में शामिल गिरफ्तार किए 40 संदिग्धों का 2016 में आरएसएस कार्यकर्ता रुद्रेश की हत्या, 2014 में चर्च स्ट्रीट विस्फोट और 2013 में मल्लेश्वरम में भाजपा कार्यालय विस्फोट जैसे मामलों में गिरफ्तार अभियुक्तों के साथ नजदीकी संबंध होने का पता चला हैं।

पुलिस सूत्रों ने CNN-News18 को बताया कि समीउद्दीन जो खुद को सोशल वर्कर बताता है, उसे बुधवार को गिरफ्तार किया गया है। समीउद्दीन से पूछताछ में पता चला है कि वह अक्टूबर 2016 में आरएसएस कार्यकर्ता रुद्रेश की हत्या के मुख्य आरोपित के संपर्क में था और एक बार उससे मिलने के लिए जेल भी गया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बेंगलुरु हिंसा को भड़काने और साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार 380 आरोपितों में से 40 अभियुक्त ऐसे हैं जिनके संबंध चर्च स्ट्रीट ब्लास्ट, मल्लेश्वरम बम विस्फोट और सांप्रदायिक तनाव से जुड़े मामलों के आरोपितों से हैं। इन मामलों में से कुछ की जाँच एनआईए द्वारा की जा चुकी है तो कुछ में जाँच जारी है।

बेंगलुरु में दंगों की रात सोशल मीडिया पर कथिततौर पर मुदस्सिर नाम के एक युवक ने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लोगों से पुलिस स्टेशन पर इकट्ठा होने की अपील की थी। फिलहाल वह फरार है और पुलिस अभी भी उसकी तलाश में जुटी है। पुलिस अब 380 आरोपितों में से उन 27 लोगों के फोन रिकॉर्ड खंगाल रही है जिन्होंने दंगा भड़काने में बड़ी भूमिका निभाई है।

बता दें बेंगलुरु हिंसा में जाँच कर रही एनआईए टीम को ऐसे कई सबूत मिले है, जिनसे दंगों के पीछे आतंकी संगठनों और दंगा फैलाने वाले नेटवर्क का हाथ होने का पता चलता है। इन लोगों में पिछले कुछ सालों में साम्प्रदयिक हिंसा को बढ़ाते हुए अपने संगठन को काफी मजबूत कर लिया है। पुलिस ने अब तक दंगों में शामिल 380 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से कई लोगों के संबंध सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) और अल हिंद आतंकी समूह जैसे संगठनों से भी हैं।

वहीं एक सेवारत IPS अधिकारी ने News18 को बताया कि डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) ज्यादातर मैंगलोर, मैसूर और बेंगलुरु में सक्रिय है। एक दशक पहले बेंगलुरु में इसकी स्थापना की गई थी जब केजी हल्ली से भी इसका संचालन किया जाता था। इस संगठन पर कर्नाटक की पिछली कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान भी प्रतिबंध लगाए जाने की तैयारी की गई थी लेकिन कानूनी झंझट के कारण इस पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सका था।

पुलिस को जाँच के दौरान हिंसा के पीछे की वजह का भी पता चला है। उनके अनुसार 11 अगस्त को डीजे हल्ली और आस-पास के इलाकों में हुई हिंसा को पुलकेशीनगर के कॉन्ग्रेस विधायक आर अखंडा श्रीनिवास मूर्ति के एक रिश्तेदार द्वारा कथित रूप से सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने के बाद अंजाम दिया गया था। जिसके चलते इस्लामी कट्टरपंथी द्वारा किए हिंसा में 3 लोगों की जान चली गई थी और सैंकड़ों लोग घायल हुए थे।

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