दिल्ली चुनाव में फेल होंगे एग्जिट पोल, 45 सीटों के साथ भाजपा की सरकार, आप को 18-20 और कांग्रेस को पांच

शनिवार को दिल्ली में विधानसभा चुनाव संपन्न हो गया है। देर रात तक चली वोटिंग के बाद जो आकड़े सामने आ रहे हैं उसके हिसाब से दिल्ली में कुल 62.59 फीसदी मतदान हुआ है। हालांकि मतदान पिछली बार की तुलना में करीब 5 प्रतिशत कम है, लेकिन लोकसभा 2019 की तुलना में 2 प्रतिशत ज्यादा है। इस बीच दिल्ली में सुबह से जिस धीमी गति से मतदान चला और शाम 6 बजे तक करीब 55 फीसदी मतदाताओं के मतदान करने की बात सामने आने के बाद सभी चैनलों और एजेंसियों को अपने-अपने एग्जिट पोल सर्वे के परिणामों को दोबारा से जांचना पड़ा, बावजूद इसके जितने भी सर्वे आये उन सबका परिणाम शाम 6 बजे तक हुये 55 प्रतिशत के आधार पर ही था। यहां दो बाते बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है कि पिछली बार भाजपा को महज तीन सीटे मिली थी, आप को 67 और कांग्रेस शून्य पर रही।

सभी सर्वे आप को 50 प्रतिशत या ज्यादा मत प्राप्त करने की बात कर रहे हैं, भाजपा को 35 से 40 के बीच और कांग्रेस के 5 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान लगा रहे हैं। 2015 में जब मतदान 67 प्रतिशत से अधिक हुआ था उस दौरान आम आदमी पार्टी को 54.3, भाजपा को 32.3 और कांग्रेस को 9.7 प्रतिशत वोट मिला था। इसबार मतदान 6 प्रतिशत कम हुआ है, बावजूद इसके आम आदमी को 56 प्रतिशत तक वोट शेयर बताया जा रहा है, भाजपा का भी प्रतिशत बढ़ाकर पिछले चुनाव में 32 से 35 प्रतिशत तक दिखाया जा रहा है, सीटों की संख्या भी बढ़ी हुयी दिखायी जा रही है। भाजपा और आप का वोट शेयर जहां संयुक्त रूप से 7 से 8 प्रतिशत बढ़ा हुआ दिखाया जा रहा है, वहीं कांग्रेस का वोट शेयर 3 से 4 प्रतिशत ही कम दिखाया जा रहा है, जो दोनों पार्टियों को ट्रांसफर हो सकता था।

फिर 6 प्रतिशत मतदान कम होने के बावजूद आप और भाजपा का यह 3-4 प्रतिशत अतिरिक्त वोट कहां से आया। यह अपने आपमें सारे एग्जिट पोल पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाते हैं। दरअसल इन चुनाव में दिल्ली में भाजपा को नही, बल्कि आम आदमी पार्टी को अपना किला बचाना था। जैसा कि सारे चैनल कह रहे हैं कि केजरीवाल के काम को इस बार लोगों ने पसंद किया है, और आप के पक्ष में मतदान किया है, तो यहाँ एक प्रश्न उठना लाजिमी है, कि अपराह्न 3 बजे तक महज 32 प्रतिशत के आसपास मतदान क्यों था? विकास के नाम पर दिल्ली की जनता क्यों निकल कर नहीं आयी, अंतिम समय तक भी मतदान पिछले चुनाव की तुलना में 6 प्रतिशत कम क्यों हुआ। लोगों की उदासीनता केजरीवाल के काम के बारे में सबकुछ बयां कर देती है, और साथ ही उसकी आसन्न हार को देखते हुये आम आदमी के पक्ष में माहौल बनाने में लगी कथित लिबरल लॉबी के हथकंडे को उजागर करती है। यह वही लॉबी है, जो अवार्ड वापसी गैंग, जेएनयू की टुकड़े-टुकड़े गैंग और अब शाहीनबाग के नाटक के पीछे है। इस लॉबी ने ऐसा माहौल बनाया, टीवी चैनलों, अखबारों में अफवाहों के जरिये ऐसा प्रतीत कराया कि केजरीवाल दिल्ली का मसीहा है और वो हार ही नहीं सकता।

भाजपा द्वारा दिल्ली में मुख्यमंत्री का उम्मीदवार प्रस्तुत नहीं किये जाने से इन चुनाव को केजरीवाल बनाम कौन भी बनाये जाने की कोशिश हुई। केजरीवाल ने भी सब हथकंडे अपनाये। हनुमान मंदिर भी गये, शाहीनबाग नहीं गये। मतदान के दिन लोगों से अपील की, कि दिल्ली में जो विकास चल रहा है, उसकी धारा को बनाये रखने के लिये ज्यादा से ज्यादा संख्या में निकल कर वोट करें। ये एक अप्रत्यक्ष अपील थे, जिसके मायने साफ थे। यह सही है कि भाजपा में दिल्ली ही नहीं अधिकांश जगह मजबूत स्थानीय नेताओं का अभाव है, परंतु भाजपा के पक्ष में मतदान करने वाले मोदी को छोड़कर किसी नेता के पक्ष में मतदान नहीं करते, अधिकांश विचारधारा को वोट करते हैं। अब एकबार प्रमुख एग्जिट पोल पर नजर डालते हैं।
टाइम्स नाउ का एग्जिट पोल

टाइम्स नाउ के एग्जिट पोल के अनुसार, दिल्ली में एक बार फिर आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी। इस एग्जिट पोल के अनुसार, देश की राजधानी दिल्ली में आम आदमी पार्टी को 44 सीटें मिलेंगी, जबकि भाजपा को 26 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, दिल्ली में एक बार फिर कांग्रेस का खाता नहीं खुलेगा।

रिपब्लिक और जन की बात का एग्जिट पोल

रिपब्लिक और जन की बात के एग्जिट पोल के अनुसार, दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बन रही है। रिपब्लिक और जन की बात के एग्जिट पोल के अनुसार, आम आदमी पार्टी को 48-61, भाजपा को 9-21 और कांग्रेस को 0-1 सीटें मिल सकती हैं।

न्यूज एक्स-नेता का एग्जिट पोल

न्यूज एक्स-नेता के एग्जिट पोल के अनुसार, आम आदमी पार्टी को 55 सीटें मिल सकती हैं।

एबीपी-सी वोटर का एग्जिट पोल

एबीपी-सी वोटर का एग्जिट पोल के अनुसार, दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार बन सकती है। एबीपी न्यूज-सी वोटर के एग्जिट पोल के अनुसार, दिल्ली में आम आदमी पार्टी को 56 सीटें मिलेंगी, जबकि भाजपा को 12 सीट पर जीत मिलने का अनुमान है। वहीं, कांग्रेस को 2 सीटें मिल सकती है।

न्यूजएक्स-पोलस्टार्ट का एग्जिट पोल

न्यूजएक्स-पोलस्टार्ट के एग्जिट पोल के अनुसार, दिल्ली में आम आदमी पार्टी को 56 और भाजपा को 14 सीटें मिलने का अनुमान है।

सुदर्शन न्यूज का एग्जिट पोल

सुदर्शन न्यूज के एग्जिट पोल के अनुसार, दिल्ली में आम आदमी पार्टी को 42 मिलने का अनुमान है, जबकि भाजपा को 26 सीटों पर जीत मिल सकती है। वहीं, कांग्रेस को 2 सीटों से संतोष करना पड़ सकता है।

इनके अलावा जितने भी एग्जिट पोल हुए हैं, उनमें शाम 6 बजे तक के 55 प्रतिशत को ही आधार बनाया गया है। कम हुए 6 प्रतिशत और शाम 6 बजे के बाद रात 11.30 बजे तक चले मतदान के बाद आये वास्तविक 61 प्रतिशत के आंकड़ें को उनमें शामिल नहीं कर पाये। इस बार के दिल्ली चुनाव में सारे एग्जिट पोल फेल होने के कगार पर है, इसमें कोई शक नहीं। वोट शेयर, 6 प्रतिशत कम मतदान के अलावा और भी कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं जिनपर सर्वे के दौरान ध्यान नहीं दिया गया। केजरीवाल इस चुनाव के दौरान भाजपा की चाल में फंसकर उसके मजबूत क्षेत्र में खेलने लगे, बजाय उसे अपने मजबूत क्षेत्र में तानने के।

भाजपा के राष्ट्रवादी और दक्षिणपंथी दांव में फंसकर वो हिंदू वोट खोने के डर से शाहीनबाग नहीं गये, जो उनका मजबूत किला था, हनुमान मंदिर गये। केजरीवाल के शाहीनबाग न जाने से मुसलमान मतदाता का भरोसा उनपर कम हुआ, और इस चुनाव में उसका फायदा कुछ हद तक कांग्रेस को हुआ। इन मतों के कांग्रेस और आप में विभाजित होने का सीधा-सीधा लाभ उन सीटों पर भाजपा को मिला, जहां मुकाबला त्रिकोणीय था या मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में था। ऐसे ही डॉ. कुमार विश्वास का आप छोड़कर चला जाना केजरीवाल के लिये इस चुनाव में एक बड़ा झटका था। कुमार अब तक जितने भी नेताओं ने आम आदमी पार्टी छोड़ी, उनमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय और जमीन से जुड़े नेता था। इसके अलावा इस चुनाव में केजरीवाल की छवि पिछले चुनाव की तुलना में खराब हुई है।

सत्ता विरोधी लहर को छोड़ ही दें, तो गुप्ता बंधु से सौदा कर राज्यसभा में भेजने आदि मुद्दों ने उन्हें भी कहीं न कहीं भ्रष्ट राजनेताओं की लाइन में लाकर खड़ा कर दिया है। शाहीनबाग न जाने से उनको जितना नुकसान हुआ है, उतना ही नुकसान शाहीनबाग के जारी रहने से भी हुआ है। जिस प्रकार शाहीनबाग के मंच का उपयोग देशविरोधी भाषणों और गतिविधियों के लिये हुआ है, उससे राष्ट्रवादी मतदाता और जो फेंस सीटर था, वो भी छिटक कर भाजपा के पाले में आ पड़ा। इन सारे मुद्दों के अलावा एक और बहुत महत्वपूर्ण बात जो भाजपा के पक्ष और आप के विरोध में गयी, वो है कि पिछले बार देशभर से 40 हजार कार्यकर्ताओं ने दिल्ली आकर आप के लिये काम किया था, जो इस बार नदारद थे, आम आदमी पार्टी को कार्यकर्ताओं की कमी साफ खल रही थी। वहीं, भाजपा के पक्ष में 300 से ज्यादा एमपी, कई मुख्यमंत्री, देशभर से सैकड़ों नेता और हजारों कार्यकर्ता काम कर रहे थे।

जहां,आप की कार्यकर्ताओं की कमी भाजपा के लिये लाभदायक रही, वहीं भाजपा कार्यकर्ताओं की समर्पित सेवा इस चुनाव का रुख पलटने वाली साबित होगी। इस चुनाव को भले ही ाम आदमी पार्टी ने केजरीवाल बनाम कौन बनाने की कोशिश की हो, परंतु यह चाल उनके लिये उलटी पड़ गयी,अब यह कमजोर आप बनाम मजबूत भाजपा की संगठन शक्ति में तब्दील हो गया। उपलब्द्ध आंकड़ों, तथ्यों और अनुसंधान के आधार पर मेरा व्यक्तिगत अनुमान है कि भाजपा 50 प्रतिशत वोट व 45 या उससे अधिक सीटें लेकर दिल्ली में अगली सरकार गठन करने जा रही है, आम आदमी पार्टी को 35 प्रतिशत के करीब वो और 18-20 सीटें कांग्रेस को 15 के प्रतिशत वोट के साथ 5 सीटें मिल सकती है। दिल्ली में 11 फरवरी को मतगणना के दौरान यह बड़ा उलटफेर सामने आयेगा, जिसमें सभी एग्जिट पोल के सर्वे का धड़ाम से गिरना तय है।

Comments